नासा: क्या है,क्या काम करता है ग्रह,उपग्रह, दूरबीन पूरी जानकारी।Nasa full information।

 नासा : क्या है,क्या कार्य करता है क्यों बनाया गया है।


क्या है नासा?

Nasa नासा यह एक संयुक्त राज्य अमेरिका की स्वतंत्र एजेंसी है।इसका पूरा नाम है नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस ऐडमिनिस्ट्रेशन National aeronautics and space administration.

क्या काम करता है?

जो नागरिक इस अनुसंधान में कार्य करते हैं वह कार्यक्रम कार्यक्रम , विमान अनुसंधान और अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए कार्य करते हैं।

कुछ विशेष जानकारी:
• नासा की स्थापना 1 अक्टूबर ,1958 को हुई थी।
• वॉशिंगटन डीसी अमेरिका में नासा का मुख्यालय बना हुआ है।
• नासा ने कई अंतरिक्ष मिशनों को अंजाम दिया है।
•नासा जो कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में भी शामिल हैं।
ISS इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन।

Nasa नासा: 

नासा हवा और अंतरिक्ष में अज्ञात चीजों की खोज करता है। सदा भी मानव कल्याण के लिए प्रयास करता रहता है आने वाली भविष्य की परेशानियों को पहले से जानना और उनका समाधान निकालना यह सभी कार्य नासा करता रहता है। एस सदैव ही दुनिया और विश्व को प्रेरित करता रहता है अपनी खोज से। लगभग 50 वर्षों से नासा ने कई संभव चीजों को संभव बनाया है। यह जलवायु सौरमंडल पृथ्वी ब्रह्मांड और सभी ग्रहों के बारे में वैज्ञानिक अध्ययन करता रहता है। और पूरी जांच रखता है।
Naca नेशनल एडवाइजरी कमेटी फॉर एयरोनॉटिक्स ,इसका उपयोग अलग अलग नागरिक विन्यास देने की लिए है।
• Naca ने कई अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रमों का नेत्तृत्व किया हुआ है। जैसे की  प्रोजेक्ट मरकरी,प्रोजेक्ट जैमिनी ,अपोलो , स्काईलैब यह सभी का नेतृत्व किया गया है।

चंद्रमा पर पहली लैंडिंग:

चंद्रमा तक पहुंचाने के लिए नासा ने कई बार प्रयास किए थे जिसमें  कई अपोलो मिशन बनाए गए थे।

Apolo 1 अपोलो 1 :

यह जल्दी ही आग के कारण ब्लास्ट हुआ और तीन वैज्ञानिक मारे गए।

Apollo 8:

यह पहला ऐसा विमान था जिसने अपनी पृथ्वी की कक्षा को पार किया था ,यह 24 दिसंबर 1968 को चंद्रमा तक पहुंच गया था और इसने चंद्रमा की 10 परिक्रमा लगाई और उसके बाद यह वापिस आ गया था।इसमें तीन अंतरिक्ष यात्री बैठे हुए थे जिन्होंने  पृथ्वी को ग्लोब के रूप में पहली बार देखा था।


अपोलो 11 Apollo:

अपोलो 11 इसी के द्वारा चंद्रमा पर पहली लैंडिंग की गई थी जिसमें में तीन अंतरिक्ष यात्री बैठे थे बज एल्ड्रिन, माइकल कोलिन और नील आर्मस्ट्रांग । अपोलो 11 को इन तीन लोगों ने ही संचालित किया था। यह अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण मिशन था।इसके बाद 6 और अपोलो मिशन संचालित किए गए।

नासा की ग्रहों पर खोज:

 चंद्रमा के बाद नासा  ने मंगल, शुक्र और बुद्ध ग्रह पर भी जांच शुरू की। यह जांच मेरीनेर कार्यक्रम के अंतर्गत हो रही  थी।
• सबसे पहला शुक्र ग्रह की जांच की गई वहां से नई खोज करने का सिलसिला शुरू हो गया,शुक्र ग्रह से यह पता चला कि इसकी विशेषताएं पृथ्वी के जैसी ही हैं।शुक्र ग्रह को बहुत ही गर्म ग्रह बताया गया जो कि बहुत अनोखी बात थी।

• मंगल ग्रह एक गहन अध्ययन का विषय बना मेरेनियर 5 यह वो यान है जिससे मंगल ग्रह तक पहुंच कर उसकी जांच की गई ।
• इसके बाद में मेरीनियर 6 और 7 आए।
• मंगल ग्रह का पहला कक्षीय मिशन मरीनेर 9  था।
• 
2013 में माविन मिशन के अंतर्गत मंगल ग्रह के ऊपरी वातावरण का अवलोकन कर लिया गया। 
• 2018 में सीस्मिक इन्वेस्टिगेशन जियोडेसी एवं हीट 
 ट्रांसपोर्ट के उपयोग से मंगल ग्रह की अंदरूनी जांच भी कर ली गई।

• 2004 में बुध ग्रह की भी जांच शुरू हो गई। 
• सन 1960 से बाहरी सौरमंडल की जांच शुरू हो गई। जिसमें पायनियर 10 के तहत ग्रहों की ऊपरी जांच पहली बार हुई। 

अंतरिक्ष दूरबीनें:

अब तक नासा ने कई अंतरिक्ष दूरबीनों को लांच किया है।
• आर्विटिंग एस्ट्रोनोमिकल ऑब्जर्वेटरी  यह 1960 में नासा द्वारा लांच की हुई पहली दूरबीन है। यह पराबैंगनी ,एक्स रे,गामा रे और अवरक्त किरणों का अवलोकन करती है।
• उहरु यह एक पहला ऐसा उपग्रह था जो की एक्स रे पर समर्पित था और जिसने ब्लैकहोल की खोज की।
• ग्रेट ऑब्जर्वेटरी कार्यक्रम नासा का सबसे शक्तिशाली दूरबीनों में से एक है जो कि 1990 से 2000 दशक के बीच लॉन्च किया गया।
• हबल स्पेस टेलिस्कोप को 1990 में एस टी इस 31 पर लॉन्च किया गया। जिसने मिल्कीवे के केंद्र में खोज की। और बताया कि अधिकतर गामा रे विस्फोट मिल्की वे के बाहर होते हैं। 
•  चंद्र एक्स-रे वेधशाला को 1999 में कोलंबिया से एस टी एस 93 पर लॉन्च किया गया जिसने क्वासर, ब्लैक होल,
सुपरनोवा, और डार्क मैटर पर अवलोकन किया था।
• स्पीटजर स्पेस टेलिस्कोप एक इंफ्रारेड टेलीस्कोप है। इसे 2003 में रॉकेट डेल्टा से लांच किया गया। इसने एक बुरे बन तारे की खोज की है और यह है पृथ्वी के बाद सूर्य के चारों ओर अवलोकन कर रहा है। 
•एस्ट्रो सोलर तारों की परिक्रमा करने वाले ग्रहों की पहचान करने के लिए केपलर अंतरिक्ष दूरबीन 2009 में लॉन्च किया गया।

उपग्रह:

नासा ने पृथ्वी का अवलोकन करने के लिए और उसके बारे में अध्ययन करने के लिए कई उपग्रह लांच किए थे। 

•टेलीविजन इंफ्रारेड ऑब्जर्वेटरी सैटेलाइट
 1960 में लॉन्च किया गया है जो की मौसम के बारे में जानकारी देता था यह एक मौसम उपग्रह है। 
• मुख्य रूप से पृथ्वी का अध्ययन और अवलोकन करने के लिए लैंड सैट उपग्रह 1972 में लॉन्च किया गया। इसी से ओजोन रिक्तिकरण की खोज हुई। 
 

कुछ खास उपलब्धियां।

प्रोजेक्ट मरकरी:

यह एक ऐसा प्रोजेक्ट है जिसमें इंसान को पहली बार अंतरिक्ष में भेजने का प्रयास किया गया। सन 1961 से 1963 तक लगभग 25 उड़ान है भरी गई जिसमें से 6 उड़ान है यात्रियों के सहित थी। इसके उद्देश्य थे पृथ्वी की कक्षा में मानव अंतरिक्ष यान की परिक्रमा होना, अंतरिक्ष में इंसान की कार्य एवं गतिविधियों की क्षमता का जांच करना एवं सुरक्षित वापस धरती पर लौट कर आना। इस मिशन ने बताया कि इंसान मानव रहित उड़ान भरने के लिए 34 घंटे तक अंतरिक्ष में कार्य कर सकता है। इंसान को अंतरिक्ष में भेजना यह नासा का पहला मिशन था। 

प्रोजेक्ट जैमिनी:

इस मिशन के तहत मिशन की प्रक्रिया और उपकरणों का परीक्षण किया गया और अपोलो मिशन के लिए कई अंतरिक्ष यात्री और विमान का प्रशिक्षण हुआ।
इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि यह मानव की लंबे समय तक अंतरिक्ष में गतिविधि को जांच कर सके और कार्य देख सके। किस प्रकार अंतरिक्ष में परिक्रमा लगाते हुए अंतरिक्ष यान क्या किसी दूसरे अंतरिक्ष यान से मिल सकता है निश्चित समय पर या फिर उसमें समा सकता है। इसी इसी प्रकार की मिशन से सुनीता विलियम्स को 2025 में अंतरिक्ष से लाया गया था जो दो महीना तक अंतरिक्ष में फंसी रही थीं। एड व्हाइट 1965 में वह पहले व्यक्ति बने जन्होंने स्पेस वॉक की थी।

अपोलो प्रोग्राम:

यह पहला ऐसा प्रोग्राम था जिसके तहत मनुष्य ने पहली बार चंद्रमा पर कदम रखा था। अपोलो 8 24 दिसंबर 1968 को चंद्रमा पर पहुंच गया था जिसने चंद्रमा की 10 परिक्रमा लगाई और सुरक्षित तरीके से पृथ्वी पर लौट आया था। अपोलो प्रोग्राम का यही उद्देश्य था कि मनुष्य को चंद्रमा तक पहुंचाना उसका अवलोकन करना एवं पृथ्वी पर वापस सुरक्षित तरीके से लौटकर आना। और पूर्ण अवलोकन के बाद अंतरिक्ष जाने वाले इंसान की कार्य क्षमताओं में बदलाव किए गए ताकि वह चंद्रमा के वातावरण में कार्य कर सके। 

पायनियर :

Pioneer पायनियर 10 और 11 को सन् 1972 और 1973 को लांच किया गया। यह दो ऐसे यह थे जो फोटो जेनिक गैस से बने हुए ग्रहण तक पहुंच पाए। यह सौरमंडल की सबसे बड़ी फोटोजेनिक ग्रह बृहस्पति और शनि तक पहुंचे थे।
एस्टेरॉयड बैल्ट , एक ऐसी जगह है जहां बृहस्पति और मंगल के बीच चट्टानें परिक्रमा लगती हैं।
इस एस्टेरॉइड बेल्ट तक पहुंचने वाला पहला पायनियर 10 था।
इसे करीब डेढ़ साल बृहस्पति गृह तक पहुंचने  में लगे थे और उसने वहां से ग्रेट रेड स्पॉट की तस्वीर पृथ्वी पर भेजी थी। 

स्काई लैब skylab:

यह एक स्पेस स्टेशन है जो कि अमेरिका का पहला स्पेसस्शन है। इसे द्वारा लांच किया गया था  इसके तहत 4 सोलर array को अपोलो टेलीस्कोप माउंट के साथ जोड़ा गया था।
इसका उपयोग सूर्य पर ऑब्जरवेशन करने के लिए किया गया था। 

वाइकिंग Viking:


Viking 1 probe यह मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक उतारने वाला पहला यान था सन् 1976। यह पहले यह था जिसने मंगल ग्रह की सतह को छुआ था और उस तक पहुंचा था।
इस वॉकिंग वैन ने बृहस्पति ग्रह पर 6 साल और 116 दिन बिताए थे और ऐसा रिकॉर्ड बनाया था कि यह ऐसा यान बन गया था जो सबसे अधिक समय तक किसी ग्रह पर रहा था।

Vyogar व्योगर:

Vyogar 1 और vyogar 2 यह दोनों है नासा के द्वारा लांच किए गए थे। जिसने हमें बृहस्पति और शनि ग्रह के बारे में काफी जानकारियां दी थ
 और इसी ने बृहस्पति के चारों ओर फैले हुए छल्ले के बारे में जानकारी भी दी थी। ब्लोगर ही था जिसने यूरेनस के 10 चंद्रमा के बारे में बताया था।

Comments

Popular posts from this blog

Trailer of jurassic world rebirth

महाकुंभ - माघ मास की पूर्णिमा को चौथा अमृत स्नान ।किस तरह करे भगवान लक्ष्मी और नारायण की पूजा।

Infinix note 50 X pro is launching in India on 27th march 2025